गणपति सबके

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“चंदन, तू क्यों उदास बैठा है?” बूढ़े बाबा ने प्यार से पूछा।

चंदन कुछ बोल नहीं पाया। वह बाबा के गले लग कर रोए जा रहा था। नौ साल का चंदन बड़ा ही समझदार था। वह अपनी गरीब माँ का सहारा था। कचरा बीनता फिर बेचता, तब जाकर दो जून रोटी कमा पाते दोनों मां बेटे। मोहल्ले के बाबा थे जिनसे वह सारी मन की बात कह देता था। मां को इसलिए नहीं बताता कि वह परेशान हो जाती थीं।

आज गणेश चतुर्थी के अवसर पर चंदन का मन मंदिर जाने का हुआ। खुशी से फूला नहीं समा रहा था। आज उसने कचरा नहीं बीना। नहाया, साफ कपड़े पहने और लग गया लाइन में। बड़ी मान्यता थी इस मंदिर की, “आज गणपति बप्पा मुझे दर्शन देंगे” यही सोच कर खुश हो रहा था। परंतु उसी क्षण उसकी खुशी पर ग्रहण लग गया। मंदिर के पंडित जी ने उसे मंदिर आने से मना कर दिया। ‘अछूत’ जो था वह। इसलिए बस रोए जा रहा था।

“बाबा मुझे आज भी मंदिर के अंदर नहीं जाने दिया। मुझे देखना है मंदिर वाले बप्पा कैसे दिखते हैं” वह रोते हुए बोला।
“बस इतनी सी बात” बाबा मुस्कुराते हुए बोले और बाजार जाकर मंदिर की मूर्ति जैसी ही दूसरी मूर्ति ले आए।

और कहा – “लो, अब इसे अपने घर में रखकर प्रिय बप्पा की गणेश चतुर्थी मना लो। गणपति बप्पा सबके हैं, किसी एक के नहीं।”

–गीता सिंह
उत्तर प्रदेश

prachi
पिता - श्री अरविंद सिंह राणा, माता - श्रीमती विमला राणा एवं पति - श्री मनोज प्रताप सिंह। शिक्षा - एम० ए० (हिंदी-अंग्रेजी), बी० एड०। सम्प्रति - लेखन एवं शिक्षण। प्रकाशित कृतियां - अनुभूति काव्य संग्रह, 'कहानियां' कहानी संकलन। प्रकाशाधीन - 'लम्हे' लघु कथा संग्रह, खामोश बचपन। सम्मान - 'द साहित्य' द्वारा जून 2020 तथा अगस्त 2020 के लिए 'टॉप ऑथर ऑफ द मंथ' से सम्मानित, के० बी० राइटर्स द्वारा सम्मान पत्र, अनुभूति 2020 अवॉर्ड। साहित्य संगम संस्थान उत्तर प्रदेश इकाई द्वारा प्राप्त गजल गौरव सम्मान, फाग मधु प्रसाद सम्मान, उ०प्र० श्रेष्ठ टिप्पणी कार सम्मान, उ° प्र° श्रेष्ठ काव्य विवेचक सम्मान। शुभ संकल्प समूह द्वारा प्राप्त सम्मान पत्र। निवास स्थान- खुर्जा, उत्तर प्रदेश। ई-मेल - geetasinghks@gmail.com ब्लॉग- मन के भावों को व्यक्त करने के लिए एक ब्लॉग पेज बनाया है- 'मेरे अपने मन के बोल'। लिंक - https://geetusingh.blogspot.com

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