तुम खूबसूरत हो(लघुकथा)

पायल अपने कमरें में बैठकर रो रही थी।कारण….किसी को पता नहीं था।माँ पूछकर हार गई,लेकिन पायल बताई नहीं।यहाँ तक की उसकी छोटी बहन जो हमेशा सहेली जैसी बन गई थी, वो भी पूछकर हार गई थी।लेकिन पायल कुछ भी नहीं बोली।

पापा ऑफिस से अभी तक आए नहीं थे।रात को 8:00 बज रहे थे।खैर,थोड़ी देर के बाद पापा भी आ गए और,कपड़े बदलने के बाद उन्होंने अपनी प्यारी गुड़िया जैसी बेटी पायल के बारे में पूछा तो माँ बोली”आपकी प्यारी बेटी नाराज होकर अपने कमरे में बैठी हुई है।”

यह सुनकर पापा अपनी बेटी के कमरे में गए और साथ में माँ एवं छोटी बहन नताशा भी गई।पापा बोले”पायल बेटी क्यों नाराज हो?किसी ने कुछ कहा है क्या?”पापा की बात सुनकर पायल बोली नम आँखों से बोली”पापा,स्कूल में सब मेरा मजाक उड़ाते है।कहते हैं की तुम साँवली हो।इसलिए, खूबसूरत नहीं हो।”यह कहकर वह उदास हो गई।अपनी बेटी पायल की बात सुनकर पापा बोले”अरे बेटी,इसमें इतना परेशान क्यों हो रही हो? तुम साँवली हो लेकिन,तुम्हारा मन साफ है।बाहरी सुंदरता तब तक कोई मायने नहीं रखती है, जब तक इंसान नम से सुंदर ना हो।और यही कारण है की तुम अपनी व्यवहार से सभी जगह प्रशंसा पाती हो।अतः, ऐसे लोगों पर ध्यान मत दो जो तुम्हारा मनोबल तोड़ते हैं”।

इतना कहकर उन्होंने पायल के आँसू पोछे और फिर साथ में सारे लोग खाना खाने के लिए चल पड़े।

:कुमार किशन कीर्ति,बिहार

 

मूल नाम:सोनू कुमार पाण्डेय साहित्यिक नाम:कुमार किशन कीर्ति शिक्षा:बी0ए0हिन्दी(प्रतिष्ठा) निवास:बिहार सम्प्रति:निजी विद्यालय में सहायक हिंदी अध्यापक और स्वतंत्र लेखक। उपलब्धि:हिंदी साहित्य संग्रह से'हिंदी प्रेरणा सम्मान'से सम्मानित,और storymirrar से' लिटरेचर कॉनल'सम्मान से सम्मानित और विभिन्न सर्टिफिकेट प्राप्त।इसके अलावा'मातृभाषा उन्नयन संस्था'से सर्टीफिकेट प्राप्त।'नव पल्लव मंथन'पत्रिका के संपादक से प्रशस्ति पत्र प्राप्त। Momspresso पर ब्लॉगर और खुद का personal blog भी है। 'अनुभव पत्रिका,नव पल्लव मंथन,हम सनातनी हैं, जयदीप पत्रिका और काव्य पथ पर'पत्रिकाओं में रचनात्मक कार्य। बाल पत्रिका'बाल प्रभात'और'ढूंढाड़ी बातें'तथा ऑनलाइन'अमर उजाला काव्य'में रचनात्मक कार्य। 'साहित्य तक'की यूट्यूब चैनल पर भी रचनाओं का प्रसारण किया गया है और स्थानीय रेडियो स्टेशन पर भी रचनाओं का प्रकाशन हुआ है।इसके अलावा 'The साहित्य'साहित्यिक वेबपेज की साप्ताहिक top रचनाओं में दो रचनाएँ'कभी कभी सोचता हूँ' और'मेरे अल्फाज'को शामिल किया गया है।

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