पुरानी चिट्ठी

कमरे की सफाई करते वक्त अचानक ही रोहन की नजर एक डायरी पर गई।उसके हाथ रुक गए,और वह वही झाडू रखकर थोड़ी दूर जमीन पर गिरी डायरी के पास गया।

रोहन शुरू से ही आत्मस्वलम्बी व्यक्ति था,और अपना काम खुद करता था।डायरी जानी-पहचानी मालूम पड़ रही थी।कौतूहलवश रोहन पास ही रखी गई कुर्सी पर बैठ गया और डायरी की पन्नों को पलटने लगा।

जैसे-जैसे वह पन्नों को पलट रहा था, ठीक वैसे ही उसकी स्मृतियाँ तेज होती जा रही थी।और अन्ततः, उसे याद आया की यह डायरी तो उस समय की है जब वह प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी कर रहा था।हालांकि,वह लेखक बनना नहीं चाहता था फिर भी उसे डायरी लिखने का शौक था।

तभी रोहन को माँ की पुरानी चिट्ठी मिल गई।प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी करने के लिए जब रोहन गाँव छोड़कर शहर आया था,तब माँ अक्सर उसे चिट्ठीयां लिखा करती थी।कभी-कभी वह रोहन के लिए चिंता व्यक्त करती तो कभी सलाह भी देती थी। उन सभी चिठ्ठीयों को रोहन बड़े ही जतन से संभाल कर रखा था और जब कभी उसे माँ और पिताजी की याद आती तो वह मन को हल्का करने के लिए उन पुरानी चिट्ठी को पढ़ लेता था।

खैर,दिन-महीने और साल गुजरते गए।आज रोहन अनुमंडल पदाधिकारी है और अपनी पत्नी तथा पिताजी के साथ सरकारी आवास में रहता है।तभी उसकी पत्नी दिव्या आकर बोली”अरे साहब!यह किसकी पुरानी चिट्ठी लेकर बैठे हुए है!”

दिव्या की आवाज सुनकर रोहन का ध्यान टूटा और वह दिव्या की तरफ देखकर बोला”जानती हो दिव्या,यह पुरानी चिट्ठीयां मेरी माँ की है जो अक्सर मेरे लिए लिखा करती थी।आज मैं जो कुछ भी हूँ अपनी स्वर्गीय माँ की प्रेरणा और पिताजी की आशीर्वाद के कारण हूँ।यह पुरानी चिट्ठीयां मेरे लिए नई चिट्ठीयां हैं जो मुझे ऊर्जावान बनाती हैं”।और इतना कहने के साथ ही रोहन की आँखें सजल हो गई।

:कुमार किशन कीर्ति,बिहार

 

मूल नाम:सोनू कुमार पाण्डेय साहित्यिक नाम:कुमार किशन कीर्ति शिक्षा:बी0ए0हिन्दी(प्रतिष्ठा) निवास:बिहार सम्प्रति:निजी विद्यालय में सहायक हिंदी अध्यापक और स्वतंत्र लेखक। उपलब्धि:हिंदी साहित्य संग्रह से'हिंदी प्रेरणा सम्मान'से सम्मानित,और storymirrar से' लिटरेचर कॉनल'सम्मान से सम्मानित और विभिन्न सर्टिफिकेट प्राप्त।इसके अलावा'मातृभाषा उन्नयन संस्था'से सर्टीफिकेट प्राप्त।'नव पल्लव मंथन'पत्रिका के संपादक से प्रशस्ति पत्र प्राप्त। Momspresso पर ब्लॉगर और खुद का personal blog भी है। 'अनुभव पत्रिका,नव पल्लव मंथन,हम सनातनी हैं, जयदीप पत्रिका और काव्य पथ पर'पत्रिकाओं में रचनात्मक कार्य। बाल पत्रिका'बाल प्रभात'और'ढूंढाड़ी बातें'तथा ऑनलाइन'अमर उजाला काव्य'में रचनात्मक कार्य। 'साहित्य तक'की यूट्यूब चैनल पर भी रचनाओं का प्रसारण किया गया है और स्थानीय रेडियो स्टेशन पर भी रचनाओं का प्रकाशन हुआ है।इसके अलावा 'The साहित्य'साहित्यिक वेबपेज की साप्ताहिक top रचनाओं में दो रचनाएँ'कभी कभी सोचता हूँ' और'मेरे अल्फाज'को शामिल किया गया है।

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