मुझे माँ चाहिए!!!

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शिल्पा को ईश्वर ने हर खुशी से नवाजा था। बहुत प्यार करनेवाला पति, बंगला, गाड़ी और नौकर-चाकर सब कुछ! कमी थी तो सिर्फ़ एक बात की, शादी के सात साल बाद भी शिल्पा की गोद सुनी ही थी। बहुत सारे डॉक्टर्स को दिखाया, इलाज करवाया लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा था। आखिरकार थक हार कर उन्होंने बच्चा गोद लेने का फैसला लिया। लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। वे बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया शुरू करते उसके पहले ही उन्हें खुशखबरी मिल गई कि शिल्पा माँ बनने वाली है और वो सुंदर से बच्ची की माँ बन गई।

शिल्पा और उसके पति ने एक फैसला किया कि अब उन्हें बच्चा गोद लेने की जरूरत तो नहीं है लेकिन इस बच्ची के हर जन्मदिन पर वे अनाथालय जाकर बच्चों को अच्छे-अच्छे गिफ़्ट और अच्छा सा नाश्ता-खाना जरूर करवायेंगे।

आज बच्ची का पहला जन्मदिन था। उस अनाथालय में 65 बच्चे थे। उन्होंने बच्चों की उम्र के हिसाब से कई सारे गिफ़्ट लिए। रुमाल, मोजे और मास्क भी लिए। बच्चों को नाश्ता करवाया जा रहा था। सभी बच्चों के चेहरे खुशी से दमक रहे थे। शिल्पा, उसके पति, अनाथालय के प्रमुख आदि खुर्चियों पर बैठ कर ये नजारा देख रहे थे। शिल्पा की बेटी इतने सारे बच्चों को एक साथ देख कर शर्मा कर बार-बार शिल्पा के आंचल में छिप रही थी। शिल्पा बहुत ही प्यार से अपनी बेटी को अपनी गोद में ले रही थी।

इतने में शिल्पा का ध्यान कोने में खड़े चार-पांच साल के एक बच्चे की तरफ़ गया। उसका ध्यान गिफ्ट की ओर या खाने पीने की ओर बिल्कुल नहीं था। वो सिर्फ़ शिल्पा और उसकी बेटी ओर लगातार देखे जा रहा था। शिल्पा को कुछ अजीब सा लगा। उसने इशारे से उस बच्चे को अपने पास बुलाया।

”बेटा, क्या तुम्हें भुख नहीं लगी? तुम नाश्ता क्यों नहीं कर रहे?”
”आंटी, क्या आप अपनी बेटी से बहुत प्यार करती है?”
”हां, मैं अपनी बेटी से बहुत प्यार करती हूं। लेकिन तुम ये क्यों पूछ रहे हो?”
”क्या हर मम्मी अपनों बच्चों से बहुत प्यार करती है?”
”हां, हर मम्मी अपने बच्चों से बहुत प्यार करती है।”
”यदि मेरी मम्मी होती, तो क्या मेरी मम्मी भी मुझ से बहुत प्यार करती?”
”हां, तुम्हारी मम्मी भी तुम से बहुत प्यार करती?”
”आंटी आपने सबके लिए बहुत सारे गिफ्ट और खाने का सामान लाया है। यदि मैं आपसे कुछ मांगु, तो क्या आप मुझे देगी?”
”बेटा, देने लायक होगा तो जरूर दुंगी। बोलो तुम्हें क्या चाहिए? इतने सारे गिफ्ट में से तुम्हें जो भी पसंद हो, वो ले लो। तुम्हें और कुछ खाना हो, तो मैं बुलवा देती हूं। बोलो, तुम्हें क्या चाहिए?”

वो दो मिनट चुप रहा। जैसे कुछ सोच रहा हो! शिल्पा ने फ़िर पूछा, ”बोलो तुम्हें क्या चाहिए?”
”मुझे माँ चाहिए!!!”

उसके मुंह से यह सुनते ही वहां एक तरह का सन्नाटा छा गया। कोई भी कुछ जबाब देने की स्थिति में नहीं था। शिल्पा और उसके पति ने एक-दूसरे की ओर देखा। शिल्पा ने पति को वहां से थोड़ी दूर आने को कहा। वहां जाकर दोनों विचार करने लगे। उस बच्चे ने जिस मासुमियत से मुझे ”माँ” होना कहा था, उसे सुन कर शिल्पा का मन अंदर तक द्रवित हो उठा था। दोनों ने फैसला किया कि उस बच्चे को माँ दे ही देते है। शिल्पा ने उस बच्चे को गोद ले लिया। इस तरह एक अनाथ बच्चे को ”माँ” मिल गई!!

-ज्योति देहलीवाल

मैं तुमसर, महाराष्ट्र की रहनेवाली हूं। मैं खुशियां बांटना चाहती हूं...चाहे वह छोटी-छोटी ही क्यों न हो! मैं ने 'आपकी सहेली' नाम से एक ब्लॉग (https://www.jyotidehliwal.com) बनाया है। मैं इस ब्लॉग के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधश्रद्धा दूर करने का, समाज में जागरुकता फैलाने का, किचन टिप्स और रेसिपीज के माध्यम से इंसान का जीवन सरल बनाने के कार्य में लगी हू। • विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख एवं कहानियां प्रकाशित। • IBlogger ने मुझे Blogger of the year 2019 चुना था।

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