समानता

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महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मिसेज शर्मा के समानता वाले शानदार वक्तव्य ने सारे हॉल को तालियों की गड़गड़ाहट से भर दिया,,,,,

जैसे ही वह मंच से नीचे आई, मैंने आगे बढ़ कर उनका अभिवादन कर उन्हें बधाई दी,,,,,,

उन्होंने भी मुस्कुराते हुए मेरा अभिवादन किया, तभी उनके फोन पर रिंग आई,,,,,

मिसेज शर्मा’सोनू कैसी रही तुम्हारी परीक्षा’

‘मां नहीं निकला अब की बार भी’

‘कोई नहीं बेटा कौन सा अंतिम अवसर है आगे भी आएंगे कई और अवसर’

मिसेज शर्मा के एक बेटा एक और एक बेटी थी, दोनों में कोई भेदभाव नहीं रखा था उन्होंने,,,,

मैं जानती थी उन्हें तो मेरे लिए समझना आसान था कि फोन पर उनका बेटा सोनू था,,,,,,

फोन रखते ही मेरी ओर देखकर वह मुस्कुराई ,,,, मैंने भी हंसते हुए पूछ लिया,’, बिटिया,कैसी है उसके यू पी एस सी के एग्जाम का क्या हुआ’

‘नहीं निकली ,मैंने भी साफ साफ कह दिया पहला और आखरी मौका था तुम्हारे लिए बस ,,,वैसे भी पूरी उम्र चूल्हा चौका ही तो करना है’

मैं हतप्रभ रह गई यह सुनकर,,,, क्या यह वही मिसेज शर्मा है जो,,,,,अभी-अभी मंच पर बेटा बेटी में समानता का बखूबी बखान कर रही थी,,,,,,,।

 

लेखिका, कवयित्री एवं समाजसेविका।
एक पुस्तक 'अधूरे अल्फाज' प्रकाशित हो चुकी है।

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