ऐसी भी एक दास्ताँ

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ऐसी भी एक दास्ताँ

कैसी दास्ताँ  है ये
ना किसी से मिलने की राह
ना कुछ पाने की चाह
नहीं है जीवन में आंनद की बात
हर समय डर की है सौगात
खुद को हर पल बचाने की है आस
हिम्मत रखने की है बात
परिवार संग रहने की है सलाह
-निहारिका

कवयित्री। मै अभी अध्ययन कर रही हूं। मेरी पहली साझा काव्य संग्रह प्रकाशनाधीन है।

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