खुशियों का पैगाम

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घूप अंधेरी रात है तो क्या हुआ, सबेरा तो आयेगा।

आज काली घटायें है तो क्या हुआ, उजाला तो होगा।।

क्यों सोच-सोचकर, अपऩा दुख बढाते हो।

खुश रहकर आगे बढ़ना, सबको सीखना होगा।।

संघर्ष ही जिंदगी है, फिर इससे क्या डरना।

लड़कर आगे बढना, हमको सीखना होगा।।

बादलों से घिरकर, सूरज कुछ समय छिप जाता है।

पर इससे वह अपना, अस्तित्व तो खो नही देता है।।

सूरज से जलना, और चांद से शीतलता सीखो।

समय से चलना, और परिस्थितियों से बदलना सीखो।।

अंधेरे को क्यों देखते हो, उजाले पर निगाहे रखो।

मर-मरकर जीने से, सीना तानकर मरना अच्छा।।

मौत तो एक सच्चाई है उससे मूंह क्या मोड़ना।

खुशी से जिंदगी जीओ, उससे क्या डरना।।

जिसने हार मान ली, वह क्या जी पायेगा।

हमेशा खुश रहो, मौत यूं ही गुजर जायेगी।।

चिताओं को क्यों देखते हो, जीने पर निगाहें रखो।

खुश रहो और खुशियां बांटो, पैगाम देना सीखो।।

डा. दलीप सिंह बिष्ट

असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्त्यमुनि रुद्रप्रयाग

हे0 नं0 बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर से एम0 एस0 सी0 (भूगोल), एम0 ए0 (राजनीति विज्ञान), बी0 एड0 की शिक्षा प्राप्त करने के बाद प्रो0 (श्रीमती) अन्नपूर्णा नौटियाल, आचार्य, राजनीति विज्ञान विभाग तथा वर्तमान में कुलपति, केन्द्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर (गढ़वाल) के कुशल निर्देशन में राजनीति विज्ञान में सन् 1999 में डी0 फिल0 की उपाधि प्राप्त की। विभिन्न राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में अपने शोध पत्र प्रस्तुत। इसके अलावा विभिन्न ब्लाॅग, पोर्टल, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं एवं पुस्तकों में छः दर्जन से अधिक शोध लेख/लेख प्रकाशन के अलावा तीन पुस्तकें ‘हिन्दी गढ़वाली काव्य संग्रह’, ‘उत्तराखण्डः विकास और आपदायें’  एवं ‘मध्य हिमालय: पर्यावरण, विकास एवं चुनौतियां’  प्रकाशित हो चुकी हैं। भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद् (IPSA) एवं यूनाइटेड प्रोफेसनल एण्ड स्कालर फार एक्शन (UPSA) के आजीवन सदस्य हैं। 2018 के भारत ज्योति पुरस्कार तथा 2020 में लाइफ टाइम गोल्डन एचीपमेन्ट अवार्ड से सम्मानित किये गये हैं। वर्तमान समय में राजनीति विज्ञान विभाग, अनुसूया प्रसाद बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं विभाग प्रभारी के पद पर कार्यरत।

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