नया साल

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साल तो बदल ही रहा है, शब्र रख तेरा हाल भी बदलेगा।

रुके कदम फिर से बड़ा, वक्त अपनी चाल भी बदलेगा।

ठहर मत तू चलता जा, इन  मोड़ों से आगे निकलता जा,

रुकावटों से मत घबरा, रास्ता अपनी हर मजाल बदलेगा।।

जमा दे पग, दुश्मन तलवार तो क्या ढाल भी बदलेगा।

दिखा धमक अपनी भी, हो रहा ये बवाल भी बदलेगा।

चुनौतियों से मुंहतोड़ निपट, जवाबों की कतार लगादे,

पूछने वाला ये वक्त, अपने पूछे सवाल भी बदलेगा।।

सीना तान, समुंदर अपनी लहरों की उछाल भी बदलेगा।

सर उठा कर जीता जा, सर पर बैठा ये काल भी बदलेगा।

अपने तेवरों को ऊंचा तो रख, रेशे रेशे को काटता जा,

बिछाने वाला शिकारी, अपने बिछाए जाल भी बदलेगा।।

फूलों से जीना सीख जरा,मुरझाया हुआ ये गाल भी बदलेगा।

जमाने की नसीहतें लेता जा,गिरगिट अपनी खाल भी बदलेगा।

खुशी की मुस्कुराहटें, घोलता जा अपनी इन रगों में इतनी,

दौड़ता है जो जिस्म में तेरे,इस लहू का रंग लाल भी बदलेगा।।

तू अपना हुनर दिखा जरा,जमाना अपना हर कमाल बदलेगा।

शतरंज की बिसाथ है जिंदगी,प्रतद्वांदी अपनी चाल भी बदलेगा।

सोच रख इस दिमाग में अपने, कुछ अच्छा कुछ बेहतर होने कि,

फिर तेरे मन में आता है जो, वो हर एक खयाल भी बदलेगा।।

साल तो बदल ही रहा है, शब्र रख तेरा हाल भी बदलेगा।।

 

मदन मोहन तिवारी,पथिक

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