भोर का तारा

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सूर्य के अस्त होने के ठीक पहले
कभी जब दिल डूबने लगता है,
अंधेरे का डर सताने लगता है ..
क्योंकि दिन में अपना साया तो
आदतन ही सही साथ चलता है,
रात को वो भी नज़र नहीं आता है ।

सूर्य के अस्त होने के ठीक पहले
विदा होता सूरज जब हाथ हिलाता है,
सारा आकाश कैनवस बन जाता है,
रंग में रंग घुल कर रोशनी हो जाता है ।
लालटेन, ढिबरी, बल्ब हमें थमा जाता है ।

दिलों में अगर रोशनी बसी हो तो
अंधेरा भी अदब से पेश आता है ।
मन के किसी कोने में टिमटिमाता दिया
सुबह का तारा बन नभ में जगमगाता है ।

लेखन से समझा जीवन को । शब्दों से बूझा भावों को . Literature has always been an inseparable part of my being, my thinking, and my understanding of life. I read and write mainly in Hindi and English. I am a freelancer and a blogger. My blog namaste नमस्ते features what I have written.

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