Thursday, November 26, 2020
prachi

Lamhe

लघुकथा -जीते जी

यहां उस की उपस्थिति अप्रत्याक्षित थी. वह दौड़दौड़ कर लकड़ी ला रहा था. जब मुखाग्नि दे कर लोग बैठ गए तो उस ने उमेश...

लघुकथा -योग्यता

निर्माणाधीन पुल के गिरने से हुई धनजन हानि की खबर पर हायतौबा मची हुई थी. सभी इस घटना से गमगीन हो कर अपनेअपने तर्क...

आत्मबल

अपनी आँखों में दहकते अंगारे लिए शीला,गाँव की पँचायत में खड़ी थी,और वहीं पास में उसके गरीब ससुर व पति भी एक कोने में...

मानवता की डोर

जितना मैं उससे पीछा छुड़ाने की कोशिश कर रहा था उतना ही वह और अधिक बलवान होकर मुझे जकड़ रहा था। लेकिन मैं इतना...

पिंजरा

पिंजरा (लघुकथा) "ऐई चंदा रानी... चल बता कौन है तेरा दल्ला?" "कोई नहीं ..... मरद के बिस्तर पकड़ने के बाद मैं ही हूं खुद की दलाल...

आत्मनिर्भर

हां जी पापा आप कहते हो आत्मनिर्भर बनो , हर समय आत्मनिर्भर बनने की सलाह देते हो आप ही बताओ ,यह कैसे संभव है...

‘लम्हे’ संग्रह हेतु लघुकथाएं

‘अति महत्वपूर्ण निर्देश’ पार्क के बाईं ओर कोने में, नीले रंग के एक बोर्ड पर कुछ निर्देश अंकित थे । 1.इस उद्यान में क्रिकेट, फ़ुटबॉल खेलना...

महामारी

बड़ा खुश था रामभजन, इस बार दो पारी में काम किया था, अच्छा पैसा मिलने वाला था।सोच रहा था,बीबी को एक सिल्क की साड़ी...

उसका दोष क्या था

द्वार को लगातार पीट रही थी रमा-'माँ जी रहम करो कहाँ जाऊँगी मैं, आप तो खुद एक माँ हो ,मुझे दर्द हो रहा है,अरे...

याद नहीं रहा

"तुमने मुझे सुबह 7 बजे मिलने का वायदा किया था।" "ओह सो सॉरी, मुझे याद ही नहीं रहा।" "रात के 8 बज रहे हैं प्रिया ;...