Wednesday, October 28, 2020
prachi

Muktak

शाम धीरे धीरे गुज़र

उनके पहलू में बैठकर, अच्छा लग रहा है ये पहर । चाय की लेते हुए चुस्कियां , लंबी बातों का ये सफ़र । शाम का ये हसीं समां...

वो गुज़रा जमाना

याद है तुमको वो हमारी बातें वो हंसी मुलाकातें। वो मेरा शर्माना तुम्हारा वो मुझे हंसाना। हमारा बारिश में भीगना, मेरा तुमसे लिपट जाना। तुम्हारा मेरे गालों को सहलाना, मेरा वो घबराना। साथ...

ज़रूरी तो नहीं

ज़रूरी तो नहीं दिल हर किसी पर आये, अपनी हर बात बताए । जुबां हर पल कुछ कहना चाहे, ख़ामोशी भी तो उसे रास आये । क़दम बढ़ते ही...

एक सी कहानी है

एक सी कहानी है... हमने सुनी सबकी ज़ुबानी है, ये दुनिया लगती सबको बेगानी है । कभी धूप जाती,कभी छांव आती, सबको ही मिलता वर्षा का पानी है। कभी...

आहट भी ना हुई यूं आ गए आप

ज़िंदगी में यूं आ गए आप, बदल गए मेरे जज़्बात। रुक गई थी नाव भंवर में, आप ने लगा दिया पार। मेरी ख़ामोशी को दिए शब्द, समझ ली दिल...

कोई ख्वाहिश नहीं

कोई ख्वाहिश नहीं... ज़िंदगी में कोई खलिश नहीं। मंज़िल पर पहुंचने की जल्दी किसे, जब हम दौड़ में शामिल ही नहीं । चाहें वो माने हमें हारा हुआ, पर...

धूप निकली है

धूप निकली है... देखो! बाहर तो आओ । क्यों "अंधेरों" को "खुद" में समेटे, "उजालों" से हो क्यों परे "हटते" । खुशियों के "फूल" खिल गए, गमों के "बादल"...

शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

गुरू बिना जीवन अधूरा गुरू बिना अधूरा ज्ञान प्रथम गुरू माँ होती है सदा हमें रखना है भान ।

मैंने सीखा

मैंने सीखा बच्चों से सीखा, बेफिक्र खिलखिलाना । सीखा हवाओं से , ख़ुशी का तराना । फूलों से सीखा , खुशबू फैलाना । सीखा फकीरों से, मस्ती में गुनगुनाना । बादलों से सीखा...

उम्मीद का परिंदा

उड़ा जा रहा है, हमें ये सिखा रहा है । जैसे बहता है पानी, बढ़ती है कहानी । रोज़ उगता है सूरज, खिलती हैं कलियां । जीवन की डगर पर, यूं...